हमारा शरीर एक उपकरण है, सुन्दर उपकरण , जादू से भरा हुआ उपकरण,जिसके साथ उसकी स्वामी आत्मा विलक्षण रीति से अलग हो जाती है | उसी प्रकार हमारी आत्मा भी परमात्मा का उपकरण है | परमात्मा उसके अंदर निवास करता है और उसका उपयोग करता है व्यक्ति को परमात्मा का जो उसके अंदर में निवास करता है | अच्छा और विश्वस्त उपकरण बनना चाहिए और प्रत्येक कर्म , विचार ,और वाणी उसे समर्पित करनी चाहिए | कर्म शरीर वाणी और मन से किए जाते हैं प्रत्येक कर्म का नियत परिणाम होता है कारण कर्म विधान अपरिवर्तनीय है परिणाम कारण में वैसे ही रहता है, जैसे बीज में वृक्ष | पानी को सूर्य सिखा देता है यह अन्यथा नहीं हो सकता | उष्णता और पानी के मिलने से यह परिणाम होगा ही यही बात सबके साथ है | परिणाम कारण के गर्भ में रहता है यदि हम गंभीरता से विचार करें तो संपूर्ण जगत अपनी विविध अंगो के कर्म के अपरिवर्तनीय नियमों के अनुसार विकसित होता दिखाई पड़ेगा | वेदांत में कर्म के इन्हीं सिद्धांत का निरूपण किया गया है कोई कर्म व्यर्थ नहीं हो सकता | कर्म करना और उसके परिणाम से बच जाना या किसी ऐसे परिणाम की आशा करना, जो किसी...
Creation108
zindagi bahot khubshurat hai esko khul kr jina chahiye..